शुक्रवार, 1 मार्च 2019

युवाओं के लिए प्रेरणादायक कार्यशाला का आयोजन


युवाओं के लिए प्रेरणादायक कार्यशाला सत्र  "व्हाट्स नेक्स्ट?" का आयोजन

वीटीसी दीपालाय ने 28 फरवरी 2019 को संजय कॉलोनी में एक कैरियर परामर्श सह प्रेरक कार्यशाला सत्र का आयोजन किया। कार्यशाला का विषय था "व्हाट्स नेक्स्ट"।
 वीसोक एडवाइजर्स के संस्थापक और सी इ ओ, श्री रवि शर्मा ने यह दिलचस्प सत्र लिया, जिसमें 36 युवाओं ने भाग लिया जिसमें वीटीसी के वर्तमान व पूर्व छात्रों के आलावा युवा क्लब के सदस्य शामिल थे।
कार्यशाला की शुरुआत में श्री रवि शर्मा ने प्रतिभागियों से पूछा कि वे क्या बनना चाहते हैं। प्रतिभागियों ने अपने सपनों को व्यक्त किया जैसे कि एक रक्षा कार्मिक, वेब डिजाइनर, नर्स, एथिकल हैकर, शिक्षक, फैशन डिजाइनर आदि। कुछ ऐसे प्रतिभागी भी थे जिन्होंने जवाब दिया कि उन्होंने अभी तक निर्णय नहीं लिया है।

अगली बात जो चर्चा में थी की ऐसे व्यवसाय का चयन करें जिसमे उनकी दिलचस्पी हो और जिसके लिए उन्हें बनाया गया है । उसके बाद श्री रवि शर्मा ने जीवन में कोई भी निर्णय लेने से पहले "क्यों" पूछने का महत्व बताया। उन्होंने छात्रों से पूछा कि वे अपने जीवन में क्या चाहते हैं। उत्तर था समृद्धि और शांति। फिर उन्होंने समझाया कि अब हम पूरी तरह से हम पर निर्भर हैं और हमारा भविष्य भी हमारे हाथों में रहेगा। यह दूसरों या स्थितियों को दोष देने से कोई फायदा नहीं है।
जीवन में समृद्धि के लिए हमें अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना होगा और उन चीजों से बचना होगा जो हमें इसे हासिल करने से विचलित करेंगी। ऐसे केंद्रित जीवन का नेतृत्व करने से हमें अपने सपनों को साकार करने और समृद्धि लाने में मदद मिलेगी। लेकिन अकेले समृद्धि हमारे जीवन में शांति नहीं ला सकती है।

जीवन में शांति, किसी से कुछ हमेशा पाने पर निर्भर नहीं करती है। बल्कि जब आप दूसरों को कुछ देना शुरू करते हैं  तभी आपको असल में मानसिक शांति मिलती है। यद्धपि हमारा परिवार हमारा केंद्र हो सकता है, धन के साथ मदद करने के रूप में हमारी मदद करता है, बुजुर्ग लोगों की तरह दूसरों के साथ समय बिताना या शारीरिक मदद की पेशकश केवल हमारे परिवार तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए बल्कि यह समाज में अन्यों के साथ करना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि स्वार्थी कार्य क्या हैं और निःस्वार्थ कार्य क्या हैं।

उन्होंने युवाओं से वर्तमान में जीने के लिए भी कहा। छोटे बच्चों के मन की शांति होती है क्योंकि वे अतीत या भविष्य के बारे में ज्यादा चिंतित नहीं होते हैं। वे हमेशा वर्तमान में रहते हैं। सफल होने के लिए हमें अतीत और भविष्य की चिंता करने के बजाय अपने वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अपने मन का अभ्यास करने की आवश्यकता है।

सत्र समाप्त करने से पहले प्रतिभागियों को प्रश्न पूछने का अवसर दिया गया जिसमें उन्होंने सामान्य और व्यक्तिगत प्रश्न पूछे जिनका उत्तर श्री रवि शर्मा ने अपनी पूर्ण संतुष्टि के लिए दिया।

परियोजना समन्वयक श्री जेम्सकुट्टी वी.ई. और दीपालय वीटीसी के कंप्यूटर प्रशिक्षक श्री प्रदीप कुमार भी इस उपयोगी कार्यशाला में शामिल हुए।

शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2019

दीपालय व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र ने चलाया कंप्यूटर साक्षरता जागरूकता अभियान



दीपालय व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र ने चलाया कंप्यूटर साक्षरता जागरूकता अभियान

दीपालय व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र के संजय कॉलोनी शाखा ने संजय कॉलोनी व आसपास के कॉलोनियों में लोगों को कंप्यूटर साक्षरता का महत्व व उपयोगिता समझाने का अभियान चलाया। जिसमे घर घर जाकर महिलाओं और नौजवानों से बातचीत और चर्चा करके विस्तार से समझाया गया और साथ ही साथ एडमिशन लेने के लिए प्रेरित किया गया।
मोबलाइजेशन टीम में शामिल कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर प्रदीप कुमार, मोब्लाइज़र मिस रीमा और लाइब्रेरियन मिस पुष्पा ने संश्था द्वारा चलाये जा रहे व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र, उसके अलग अलग पाठ्यक्रमों, सामुदायिक लाइब्रेरी व अन्य सुविधावों के बारे में बताया।

इंस्ट्रक्टर प्रदीप ने बताया की दीपालय कंप्यूटर सेंटर संजय कॉलोनी, शंस्था द्वारा दिल्ली के विभिन्न इलाकों में चलाये जा रहे व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों में से एक है, जहाँ कंप्यूटर कोर्स फॉर आईटी एंड बिगनर्स, कंप्यूटर कोर्स फॉर एडवांस वर्ड एंड एक्सेल, कंप्यूटर कोर्स फॉर डिजिटल लिटरेसी, डाटा एंट्री, ग्राफ़िक डिजाइनिंग और वेब डिज़ाइनिंग जैसे कोर्सेज कराये जाते हैं।

प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर जेम्स कुट्टी ने बताया की दिल्ली में दीपालय द्वारा संचालित चार व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र, एन.आई.आई.टी फाउंडेशन के सहयोग से विभिन्न कंप्यूटर पाठ्यक्रमों को चला रहे है। जिसके जरिये समाज के वंचित युवाओं को कंप्यूटर प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। केंद्रों का उद्देश्य छात्रों के बीच उद्यमशीलता और व्यक्तित्व गुणों को विकसित करना है, साथ ही उन्हें कॉर्पोरेट् और अन्य क्षेत्रों में नौकरियों के लिए तैयार करना है।

दीपालाय के बारे में
दीपालाय एक आईएसओ 9001:2008 प्रमाणित गैर-सरकारी संगठन है जो आत्मनिर्भरता को सक्षम करने में विश्वास करता है और महिलाओं और बच्चों पर विशेष ध्यान देने के साथ शहरी और ग्रामीण गरीबों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह गैर-सरकारी संगठन 16 जुलाई, 1979 को सात संस्थापक सदस्यों द्वारा शुरू किया गया था और तीन से अधिक दशकों से निरक्षरता के विरूद्ध धर्मयुद्ध में योगदान दे रहा है। वर्षों से दीपालय ने शिक्षा (औपचारिक/गैर-औपचारिक/उपचारात्मक), महिला सशक्तिकरण (प्रजनन स्वास्थ्य, एसएचजी, माइक्रो-फाइनेंस), संस्थागत देखभाल, सामुदायिक स्वास्थ्य, व्यावसायिक प्रशिक्षण आदि के क्षेत्रों में कई परियोजनाएं चलायी हैं। हमारी परियोजनाएं दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, और तेलांगना में चल रही हैं।

शनिवार, 9 फ़रवरी 2019

सफदरजंग अस्पताल में नाकाफ़ी व्यवस्था: ठिठुरती ठंड में सड़क पर सोने को मजबूर परिजन

सफदरजंग अस्पताल में नाकाफ़ी व्यवस्था: ठिठुरती ठंड में सड़क पर सोने को मजबूर परिजन देश के बड़े अस्पतालों में शुमार दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल, जहाँ दिल्ली व आसपास के राज्यों के दूरदराज़ इलाक़ों से मरीज़ अपने परिजनों के साथ इलाज कराने आते हैं लेकिन यहाँ ठहरने का उचित प्रबंध न होने की वजह से सैकड़ों लोग हड्डियों को कंपकंपाती ठंड में भी सड़क, फुटपाथ व गलियों में सोने को मजबूर हैं। औरतों, बच्चों व बुज़ुर्गों का इमेरजेंसी व विभिन्न वार्डों के बाहर एक चटाई पर लेटे और एक कम्बल ओढ़े ठंड से कांपते परिजनों की ठिठुरती आँखें, अंदर भर्ती किसी अपने के बेहतरी को तकती हैं और सरकार के तमाम झूठे दावों की पोल खोलतीं हैं। जिसमे कहा जाता है की दिल्ली के अस्पताल सम्पूर्ण सुविधा संपन हैं। ओखला से आयी किरण जिनके परिवार का एक सदस्य डिलिवरी वार्ड में भर्ती है, ने बताया की अंदर का इंतज़ाम भी नाकाफ़ी है। वार्ड में बेड ख़ाली नहीं हैं जिसकी वजह से एक बेड पर दो या दो से ज़्यादा मरीज़ इलाज करवाने को मजबूर हैं। इसके अलावा उन्होंने बताया की हर मरीज़ के साथ इजाजतन रुके एक परिजन के बैठने व सोने का कोई उचित प्रबंध भी नहीं है। परिजनों को बेड के नीचे बैठना पड़ता है। जहाँ कोकरेच भी घुमते रहते हैं। और इसी वजह से परिवार के कई सदस्य बरी बारी से मरीज़ के पास रहते हैं। उन्होंने बताया की परिजनों के बिस्तर, ओढ़ने व ठहरने का कोई प्रबंध अस्पताल की तरफ़ से नहीं किया हुआ है। हमें अपना प्रबंध ख़ुद करना पड़ता हैं। और कहीं जगह नहीं मिलने पर खुले फुटपाथ पर सोना पड़ता हैं।

रविवार, 3 फ़रवरी 2019

खेलकूद के माध्यम से युवावों में अच्छी आदतों, आत्मविश्वास और अनुशासन का निर्माण

                                                              Deepalaya Cricket Tournament

खेलकूद के माध्यम से युवावों में अच्छी आदतों, आत्मविश्वास और अनुशासन का निर्माण


नई दिल्ली, फरवरी 6th 2019: दीपालय गैर सरकारी शंस्था द्वारा दिल्ली केविभिन्न इलाकों में चलाये जा रहे व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्रों के विधार्थियों के सम्पूर्ण विकास के लिए अन्तः वीटीसी क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन किया। जिसमे व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र संजय कॉलोनी, गोल कुआँ, ककरोला व पटेल गार्डन से छात्रों ने हिस्सा लिया। इसका आयोजन तुग़लकाबाद के कायामाया ग्राउंड में किया गया जिसमे खिलाडियों ने बेहतरीन खेल का प्रदर्शन किया।

इस टूर्नामेन्ट का आयोजन, शंस्था के साउथ दिल्ली व्यावसायिक प्रशिक्षण केन्द्रो के प्रोजेक्ट कॉर्डिनेटर श्री जैम्स कुटटी वीइ; कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर श्री प्रदीप चौहान, कु: कोमल राठौर, व श्रीमती कुलवंत कौर की मौजूदगी में किया गया। जिसमे द्वारका और ओखला के स्लम कॉलोनियों के लगभग 30 नौजवानो ने भाग लिया। मैच के साथ-साथ टूर्नामेंट दीपालय की वेस्ट दिल्ली टीम ने जीत लिया, जिसने प्रतिद्वंद्वी दीपालय की दक्षिण दिल्ली की टीम को 7 विकेट से ​​हराया।

श्री जैम्स कुटटी के अनुसार, “दीपालय नियमित अंतराल पर ऐसे आयोजन करता रहता है क्योंकि खेल कूद से अच्छी आदतों, आत्मविश्वास और अनुशासन का निर्माण होता हैं। इससे खिलाड़ियों में लीडरशिप का विकास होता है।”

दिल्ली में दीपालय द्वारा संचालित चार व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र, एन.आई.आई.टी फाउंडेशन के सहयोग से विभिन्न कंप्यूटर पाठ्यक्रमों को चला रहा है, और समाज के वंचित युवाओं को कंप्यूटर प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। केंद्रों का उद्देश्य छात्रों के बीच उद्यमशीलता और व्यक्तित्व लक्षणों को विकसित करना है, साथ ही उन्हें कॉर्पोरेट् और अन्य क्षेत्रों में नौकरियों के लिए तैयार करना है।

दीपालाय के बारे में
दीपालाय एक आईएसओ 9001:2008 प्रमाणित गैर-सरकारी संगठन है जो आत्मनिर्भरता को सक्षम करने में विश्वास करता है और महिलाओं और बच्चों पर विशेष ध्यान देने के साथ शहरी और ग्रामीण गरीबों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह गैर-सरकारी संगठन 16 जुलाई, 1979 को सात संस्थापक सदस्यों द्वारा शुरू किया गया था और तीन से अधिक दशकों से निरक्षरता के विरूद्ध धर्मयुद्ध में योगदान दे रहा है। वर्षों से दीपालय ने शिक्षा (औपचारिक/गैर-औपचारिक/उपचारात्मक), महिला सशक्तिकरण (प्रजनन स्वास्थ्य, एसएचजी, माइक्रो-फाइनेंस), संस्थागत देखभाल, सामुदायिक स्वास्थ्य, व्यावसायिक प्रशिक्षण आदि के क्षेत्रों में कई परियोजनाएं चलायी हैं। हमारी परियोजनाएं दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, और तेलांगना में चल रही हैं।

दीपालय संस्था ने चलाया "स्वच्छ समुदाय" अभियान

दीपालय संस्था ने चलाया "स्वच्छ समुदाय" अभियान

“कभी भी संदेह न करें कि विचारशील, प्रतिबद्ध, नागरिकों का एक छोटा समूह दुनिया को बदल सकता है। वास्तव में, यह केवल एक चीज है जो कभी भी है। ”- मार्गरेट मीड के प्रेरक विचारों को साकार करते हुए आज दीपालय संस्था के व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र, संजय कॉलोनी के कर्मचारियों और छात्रों ने "स्वच्छ समुदाय" अभियान का आयोजन किया। 
इस सफाई अभियान में लोगों के एक छोटे समूह ने उस क्षेत्र को, जहाँ कूड़ा घर न होने की वजह से भारी मात्रा में कूड़ा करकट फैला हुआ था उसे  साफ करने का जिम्मा उठाया।  प्रशिक्षण केंद्र के क्रिकेट टीम के खिलाडियों ने अपने इंस्ट्रक्टर की अगुवाई में सफाई करना शुरू कर दिया।
समूह के प्रयासों को देखने के बाद, लर्निंग सेंटर के अन्य कर्मचारी, विद्यार्थी बच्चे, दर्शक बने कॉलोनी के युवा  व अन्य निवासी भी शामिल होते गए और सफाई अभियान में अपना योगदान दिया। देखते ही देखते कूड़े के बहूत बड़े ढेर को साफ कर दिया गया।
युवावों द्वारा चलाये जा रहे कुछ लाइव वीडियो को देखने तथा फोन द्वारा शिकायत के बाद, एमसीडी अच्छी भूमिका में आई और इस क्षेत्र को साफ करने के लिए अपने वाहन और जेसीबी को भेजा और सफाई किया।

अंततः दीपालय द्वारा चलाया गया यह एक सफल अभियान साबित हुआ जिसने न सिर्फ क्षेत्र को साफ किया, बल्कि वहां के छात्रों, कर्मचारियों, कॉलोनी के युवावों व निवासियों को प्रेरित किया की कंधे से कंधा मिलाकर क्षेत्र को साफ किया जाये और स्वच्छता  बनाये रखी जाये।

क्षेत्र के जागरूक निवासियों ने इस प्रशंशनीय कार्य के लिए तथा समुदाय की बेहतरी में योगदान के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से दीपालय को धन्यवाद किया । और साथ ही साथ बहुत कम दिखने वाले एमसीडी विभाग के तत्काल प्रतिक्रिया को भी सराहा।

शनिवार, 1 दिसंबर 2018

घर घर पानी के कनेक्शन की मांग के लिए विशाल रैली

water problem in slum

घर घर पानी के कनेक्शन की मांग के लिए विशाल रैली

30 नवम्बर, 2018 नई दिल्ली: ‘अब अपमान नहीं सहेंगे, घर-घर पानी लेकर रहेंगे’ इस नारे को लेकर, संजय कालोनी (ओखला) के निवासियों ने लोक राज संगठन की अगुवाई में, दिल्ली सरकार से घर-घर पाइप के जरिए पीने का पानी उपलब्ध कराने की मांग को लेकर मंडी हाउस से लेकर संसद मार्ग तक मार्च किया।

निवासियों ने अपने हाथों में प्लाकार्ड थे, जिन पर लिखा था - ‘सरकार तुम बताओ, टैंकर पर पानी भरें या पढ़ाई करें!’, ‘संजय कालोनी वर्षों से सूखी है, चुनावी पार्टियां सिर्फ सत्ता की भूखी हैं!’, ‘‘जैसे है, बिजली कनेक्शन, वैसे हो हर घर में पानी कनेक्शन!और ’दिल्ली सरकार ने दिया धोखा, जल अधिकार कनेक्शन को रोका!’।इस प्रदर्शन में, महिलाओं, पुरुषों और छात्रों ने भाग लिया।

आम आदमी पार्टी 2015 में बनी। आम आदमी पार्टी द्वारा 2015 में जारी घोषणापत्र कहती है कि ‘आम आदमी पार्टी एक अधिकार के रूप में पानी उपलब्ध कराएगी। पार्टी किफायती मूल्य पर दिल्ली के सभी नागरिकों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा देगी। पानी को अधिकार बनाने के लिए आम आदमी पार्टी दिल्ली जल बोर्ड के अधिनियम में भी संशोधन करेगी। एक समयबद्ध योजना के तहत दिल्ली को दिल्ली जल बोर्ड के पाइप कनेक्शन व सीवेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। पानी सप्लाई व वितरण प्रणाली को सुचारू बनाया जाएगा।

रैली में शामिल संगम विहार निवासी ललित कुमार ने बताया कि, खुद में संगम विहार एक विधानसभा है। यहां का विधायक, दिल्ली जल बोर्ड (दिजेबी) का वाइस चेयरमैन है। यहां असुरक्षित पानी की सप्लाई अमूमन 15 दिन में एक बार होती है। 

वहीं, मदनपुर खादर पुनर्वास कालोनी के निवासी इकलाक इकलाक का कहना है कि सरकार ने कालोनी 20 साल पहले बसाया था। यहां के लोग भूमिगत जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं। इस तरह की कालोनियां दिल्ली में सैकड़ों हैं।

रैली जैसे ही जंतर-मंतर पहुंची एक प्रदर्शन में तब्दील हो गयी। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के दिल्ली सचिव धीरेन्द्र शर्मा ने बताया कि ‘पीने योग्य पानी’ पर हर शहरी का बुनियादी अधिकार है। 21वीं सदी चल रही है। दिल्ली देश की राजधानी है। ‘पानी’ के लिए यहां मां, बहनों व बच्चों को टैंकरों के पीछे दौड़ना पड़ता है। यह आधुनिक और सभ्य नागरिक समाज पर एक कलंक है। नागरिकों का अपमान है।

प्रदीप कुमार चैहान ने कहा कि बिजली की भांति, बिना किसी भेदभाव के दिजेबी घर-घर पीने का पानी उपलब्ध कराए। उचित शुल्क लें। ऐसा करने से, न सिर्फ वोट बैंक की गंदी राजनीति रूकेगी, बल्कि पानी की बर्बादी, टैंकर पर अनावश्यक खर्च, भूमिगत पानी की अबाध चोरी, रुकेगी और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। दिजेबी की आय बढ़ेगी। नए रोज़गार बढ़ेंगे। इस जायज़ मांग को लोक राज संगठन 2004 से उठाता आ रहा है।

लोक राज संगठन के दिल्ली सचिव बिरजू नायक ने बताया कि संजय कालोनी (ओखला) के निवासी 41 साल से पानी के टैंकर के पीछे भाग रहे हैं। गांव, झुग्गी-झोपड़ी, पुनर्वासित व कच्ची कालोनी में रहने वाले नागरिकों को ‘दोयम दर्जे’ का कहकर, इनके घरों के अंदर पीने का पानी उपलब्ध कराने से सरकार इनकार करती है। घर-घर बिजली कनेक्शन है, लेकिन सबसे ज़रूरी ‘पानी’ का कनेक्शन नहीं है!
संजय कालोनी (ओखला) के स्थानीय निवासी पिंटू भाई कहा कि दिजेबी कनेक्शन वाले घर में, 20 हजार लीटर तक पानी हर महीने फ्री में मिलता है। 14 लाख परिवारों के पास दिजेबी के कनेक्शन नहीं हैं! तो फ्री कैसा? 
स्थानीय निवासी लोकेश कुमार ने कहा कि, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस मांग पर हमसे मिलने से इनकार करते रहे हैं। अतः इसी मुद्दे को लेकर, 27 जुलाई, 2016 को संसद मार्ग पर धरना देना पड़ा। इसके ठीक एक महीने बाद, सरकार ने 30 अगस्त, 2016 झुग्गी बस्तियों, कच्ची और पुनर्वास कालोनियों में घर-घर पानी पहुंचाने के लिए ‘जल अधिकार कनेक्शन’ योजना की घोषणा की। आज घोषणा हुए ढाई साल होने को आ रहा है, लेकिन जमीन पर लागू नहीं है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि, दिल्ली सरकार ने घर-घर पीने का पानी नहीं पहुंचाया तो, हरेक कालोनी इस सरकार के खिलाफ़ प्रदर्शन करेगी।
प्रदर्शन को संबोधित करने वालों में थे - कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी से संतोष कुमार, पुरोगामी महिला संगठन से पूनम, स्थानीय निवासियों - पूजा, रौनिक साग, ओम प्रकाश, हरिओम, विरेन्द्र कुमार, संदीप कुमार, अकबर खान, राजू आदि। 
इस प्रदर्शन के उपरांत, हुसैन और प्रदीप कुमार दो सदस्य प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक ज्ञापन सौंपा।

सोमवार, 19 नवंबर 2018

राजधानी दिल्ली में पीने के पानी के लिए नौजवानों का आंदोलन।


"पानी" जो हर इंसान की पहली जरूरत है। पानी जिसके बिना जीवन संभव नही। पानी जो हर सरकार की जिम्मेदारी है कि वो हर नागरिक को सम्मान के साथ मुहैया कराए।

देश की राजधानी दिल्ली, जहा एक तरफ जगमगाहट है, चकाचौंध है, संसद भवन, लाल किला, अक्षरधाम जैसे पर्यटक स्थल हैं। स्टैण्डर्ड ऑफ लिविंग बहोत हाई है। जिसे देखकर गर्व होता है की हम दिल्ली में रहते हैं।
लेकिन ये सिक्के का सिर्फ एक पहलू है। दिल्ली का एक रूप और भी है जिसे अगर प्रेजेंट किया जाए तो शायद आप भी शर्म महसूस करेंगे।
साथियों यहां बात हो रही है दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एरिया में बसे संजय कॉलोनी व आसपास की कॉलोनियों की। 40 साल पहले इन कॉलोनियों को ओखला इंडस्ट्रियल एरिया के बड़े इंडस्ट्रियल घरानों को फायदा देने व सस्ते लेबर मुहैया कराने के लिए बसाया गया था।


ये वो दिल्ली है जहां की औरतों को कई कई घंटे, आधे आधे दिन पानी के लिए, टैंकरों के इंतजार में सड़कों पर बिताना पड़ता है। पति के रोजगार और बच्चों के स्कूल ना छूटे इसके लिए इन्हें खुद बाल्टियों, टंकियों और साइकिलों से पानी भरने का बीड़ा उठाना पड़ता है। चाहे बीमार हों या प्रेगनेंसी हो अगर टैंकरों पर नहीं जाएं तो पीने तक का पानी नहीं मिल सकता।
यहां की बच्चियों को स्कूल बैग की जगह टंकी व बाल्टियों को लेकर जाना पड़ता है। स्कूल जाने में देर हो रही हो या स्कूल छूट ही क्यों न जाये पर टैंकर का इन्तेजार करना और हर हाल में पानी भरने इनकी मजबूरी है। अगर ये पानी छोड़ स्कूल जाएं तो खुद की पढ़ाई तो होगी पर पूरे परिवार को पीने का पानी नहीं मिलेगा।
यहां के बुज़ुर्गो को मजबूरन घुटने का दर्द लिए पानी के लिए दौड़ लगाना पड़ता है। मैन रोड से कंधे पर या साइकिलों से अपनी गली, अपने घर तक ढोकर लाना पड़ता है। 
यहां के मजदूर को पानी के लिए अपने दहाड़ी और नौकरिया की बार बार कुर्बानी देनी पड़ती है। टैंकर आने में देरी या पानी भरने में देरी हो जाये तो लेट होने की वजह से हाफ डे लग जाता है या कई बार वापिस आना पड़ जाता है।
यहां के लड़कों के लिए शादी के रिश्ते नही आते क्योकि देश की राजधानी दिल्ली में ऐसे जगह है जहा घूंघट में रहकर भी पानी भरना पड़ता है।
यहां के नेताओं ने पानी की समस्या को ज्यों का त्यों बना कर रखा है। इसकी पूर्ति के वादों व लालच देकर कॉलोनी के लोगों का वोट छला जाता है। और मजबूर किया जाता है की नौजवां उनके आगे पीछे घूमें।
40 वर्षों से लगातार अनेक पार्टियां आयीं पर किसी पार्टी ने पानी के घर घर कनेक्शन के लिए काम नहीं किया। इस समस्या के ज्यो का त्यों बनाकर वोट बटोरने का मुख्य हथियार के रूप में जीवंत रखा गया है।
देश के सबसे बड़े आंदोलन से आयी, दिल्ली की सबसे ज्यादा बहुमत प्राप्त पार्टी से लोगों को बहुत उम्मीदें थी की सालो  से सुखी कॉलोनोयों को ये पानी देगी और परमानेंट सोल्ल्युशन निकलेगी।
लेकिन पिछले 3 वर्षो मे इस पार्टी ने भी इसपर कोई काम नहीं किया और लोगों को धोखा दे रही है।

नौजवानों का आंदोलन

यहां के नौजवां जिनका बचपन यह बिता है और अब वो बच्चे वाले बनने लगे है। इन्होंने घर घर पानी के कनेक्शन की मांग के लिए एक आंदोलन चलाया हुआ है जिसमे वो घर घर जाकर लोगो को जागरूक कर रहे हैं।
गली गली नुक्कड़ सभाएं कर लोगों को एकजुट कर रहे है।
नाटकों, कविताओं और गीतों के द्वारा लोगों को संगठित कर रहे है।  और धीरे धोरे नौजवानों की एक फौज तैयार हो रही है जो इस मांग को घर, गली, कॉलोनियों के रास्ते पूरे क्षेत्र और पूरी दिल्ली में लेकर जा रहे है। 

ये आन्दोल एक व्यापक रूप लेता जा रहा है जिसमे लोग भीख की तरह, भेड़ बकरियों की तरह मिलने वाले पानी को अपने अधिकार बतौर देने की मांग कर रहे है। इंसान बतौर सम्मान के साथ देने की मांग कर रहे है। मांग कर रहे हैं की उनके घरों में जल बोर्ड का कनेक्शन लगाकर, मीटर लगाकर पानी दिया जाए।

नशे की दलदल में डूबता बचपन : प्रदीप चौहान

दिल्ली की स्लम बस्तियों में दस-दस साल के बच्चे, छोटी उम्र में गांजा, शराब व अन्य बुरी आदतों के शिकार हो रहे हैं। जिस उम्र में ज्यादातर बच्चे...