"पानी" जो हर इंसान की पहली जरूरत है। पानी जिसके बिना जीवन संभव नही। पानी जो हर सरकार की जिम्मेदारी है कि वो हर नागरिक को सम्मान के साथ मुहैया कराए।
देश की राजधानी दिल्ली, जहा एक तरफ जगमगाहट है, चकाचौंध है, संसद भवन, लाल किला, अक्षरधाम जैसे पर्यटक स्थल हैं। स्टैण्डर्ड ऑफ लिविंग बहोत हाई है। जिसे देखकर गर्व होता है की हम दिल्ली में रहते हैं।
लेकिन ये सिक्के का सिर्फ एक पहलू है। दिल्ली का एक रूप और भी है जिसे अगर प्रेजेंट किया जाए तो शायद आप भी शर्म महसूस करेंगे।
लेकिन ये सिक्के का सिर्फ एक पहलू है। दिल्ली का एक रूप और भी है जिसे अगर प्रेजेंट किया जाए तो शायद आप भी शर्म महसूस करेंगे।
साथियों यहां बात हो रही है दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एरिया में बसे संजय कॉलोनी व आसपास की कॉलोनियों की। 40 साल पहले इन कॉलोनियों को ओखला इंडस्ट्रियल एरिया के बड़े इंडस्ट्रियल घरानों को फायदा देने व सस्ते लेबर मुहैया कराने के लिए बसाया गया था।
ये वो दिल्ली है जहां की औरतों को कई कई घंटे, आधे आधे दिन पानी के लिए, टैंकरों के इंतजार में सड़कों पर बिताना पड़ता है। पति के रोजगार और बच्चों के स्कूल ना छूटे इसके लिए इन्हें खुद बाल्टियों, टंकियों और साइकिलों से पानी भरने का बीड़ा उठाना पड़ता है। चाहे बीमार हों या प्रेगनेंसी हो अगर टैंकरों पर नहीं जाएं तो पीने तक का पानी नहीं मिल सकता।
यहां की बच्चियों को स्कूल बैग की जगह टंकी व बाल्टियों को लेकर जाना पड़ता है। स्कूल जाने में देर हो रही हो या स्कूल छूट ही क्यों न जाये पर टैंकर का इन्तेजार करना और हर हाल में पानी भरने इनकी मजबूरी है। अगर ये पानी छोड़ स्कूल जाएं तो खुद की पढ़ाई तो होगी पर पूरे परिवार को पीने का पानी नहीं मिलेगा।
यहां के बुज़ुर्गो को मजबूरन घुटने का दर्द लिए पानी के लिए दौड़ लगाना पड़ता है। मैन रोड से कंधे पर या साइकिलों से अपनी गली, अपने घर तक ढोकर लाना पड़ता है।
यहां के मजदूर को पानी के लिए अपने दहाड़ी और नौकरिया की बार बार कुर्बानी देनी पड़ती है। टैंकर आने में देरी या पानी भरने में देरी हो जाये तो लेट होने की वजह से हाफ डे लग जाता है या कई बार वापिस आना पड़ जाता है।
यहां के लड़कों के लिए शादी के रिश्ते नही आते क्योकि देश की राजधानी दिल्ली में ऐसे जगह है जहा घूंघट में रहकर भी पानी भरना पड़ता है।
यहां के नेताओं ने पानी की समस्या को ज्यों का त्यों बना कर रखा है। इसकी पूर्ति के वादों व लालच देकर कॉलोनी के लोगों का वोट छला जाता है। और मजबूर किया जाता है की नौजवां उनके आगे पीछे घूमें।
40 वर्षों से लगातार अनेक पार्टियां आयीं पर किसी पार्टी ने पानी के घर घर कनेक्शन के लिए काम नहीं किया। इस समस्या के ज्यो का त्यों बनाकर वोट बटोरने का मुख्य हथियार के रूप में जीवंत रखा गया है।
देश के सबसे बड़े आंदोलन से आयी, दिल्ली की सबसे ज्यादा बहुमत प्राप्त पार्टी से लोगों को बहुत उम्मीदें थी की सालो से सुखी कॉलोनोयों को ये पानी देगी और परमानेंट सोल्ल्युशन निकलेगी।
लेकिन पिछले 3 वर्षो मे इस पार्टी ने भी इसपर कोई काम नहीं किया और लोगों को धोखा दे रही है।
नौजवानों का आंदोलन
यहां के नौजवां जिनका बचपन यह बिता है और अब वो बच्चे वाले बनने लगे है। इन्होंने घर घर पानी के कनेक्शन की मांग के लिए एक आंदोलन चलाया हुआ है जिसमे वो घर घर जाकर लोगो को जागरूक कर रहे हैं।
यहां के नौजवां जिनका बचपन यह बिता है और अब वो बच्चे वाले बनने लगे है। इन्होंने घर घर पानी के कनेक्शन की मांग के लिए एक आंदोलन चलाया हुआ है जिसमे वो घर घर जाकर लोगो को जागरूक कर रहे हैं।
गली गली नुक्कड़ सभाएं कर लोगों को एकजुट कर रहे है।
नाटकों, कविताओं और गीतों के द्वारा लोगों को संगठित कर रहे है। और धीरे धोरे नौजवानों की एक फौज तैयार हो रही है जो इस मांग को घर, गली, कॉलोनियों के रास्ते पूरे क्षेत्र और पूरी दिल्ली में लेकर जा रहे है।
नाटकों, कविताओं और गीतों के द्वारा लोगों को संगठित कर रहे है। और धीरे धोरे नौजवानों की एक फौज तैयार हो रही है जो इस मांग को घर, गली, कॉलोनियों के रास्ते पूरे क्षेत्र और पूरी दिल्ली में लेकर जा रहे है।
ये आन्दोल एक व्यापक रूप लेता जा रहा है जिसमे लोग भीख की तरह, भेड़ बकरियों की तरह मिलने वाले पानी को अपने अधिकार बतौर देने की मांग कर रहे है। इंसान बतौर सम्मान के साथ देने की मांग कर रहे है। मांग कर रहे हैं की उनके घरों में जल बोर्ड का कनेक्शन लगाकर, मीटर लगाकर पानी दिया जाए।



