शनिवार, 1 दिसंबर 2018

घर घर पानी के कनेक्शन की मांग के लिए विशाल रैली

water problem in slum

घर घर पानी के कनेक्शन की मांग के लिए विशाल रैली

30 नवम्बर, 2018 नई दिल्ली: ‘अब अपमान नहीं सहेंगे, घर-घर पानी लेकर रहेंगे’ इस नारे को लेकर, संजय कालोनी (ओखला) के निवासियों ने लोक राज संगठन की अगुवाई में, दिल्ली सरकार से घर-घर पाइप के जरिए पीने का पानी उपलब्ध कराने की मांग को लेकर मंडी हाउस से लेकर संसद मार्ग तक मार्च किया।

निवासियों ने अपने हाथों में प्लाकार्ड थे, जिन पर लिखा था - ‘सरकार तुम बताओ, टैंकर पर पानी भरें या पढ़ाई करें!’, ‘संजय कालोनी वर्षों से सूखी है, चुनावी पार्टियां सिर्फ सत्ता की भूखी हैं!’, ‘‘जैसे है, बिजली कनेक्शन, वैसे हो हर घर में पानी कनेक्शन!और ’दिल्ली सरकार ने दिया धोखा, जल अधिकार कनेक्शन को रोका!’।इस प्रदर्शन में, महिलाओं, पुरुषों और छात्रों ने भाग लिया।

आम आदमी पार्टी 2015 में बनी। आम आदमी पार्टी द्वारा 2015 में जारी घोषणापत्र कहती है कि ‘आम आदमी पार्टी एक अधिकार के रूप में पानी उपलब्ध कराएगी। पार्टी किफायती मूल्य पर दिल्ली के सभी नागरिकों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा देगी। पानी को अधिकार बनाने के लिए आम आदमी पार्टी दिल्ली जल बोर्ड के अधिनियम में भी संशोधन करेगी। एक समयबद्ध योजना के तहत दिल्ली को दिल्ली जल बोर्ड के पाइप कनेक्शन व सीवेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। पानी सप्लाई व वितरण प्रणाली को सुचारू बनाया जाएगा।

रैली में शामिल संगम विहार निवासी ललित कुमार ने बताया कि, खुद में संगम विहार एक विधानसभा है। यहां का विधायक, दिल्ली जल बोर्ड (दिजेबी) का वाइस चेयरमैन है। यहां असुरक्षित पानी की सप्लाई अमूमन 15 दिन में एक बार होती है। 

वहीं, मदनपुर खादर पुनर्वास कालोनी के निवासी इकलाक इकलाक का कहना है कि सरकार ने कालोनी 20 साल पहले बसाया था। यहां के लोग भूमिगत जहरीला पानी पीने को मजबूर हैं। इस तरह की कालोनियां दिल्ली में सैकड़ों हैं।

रैली जैसे ही जंतर-मंतर पहुंची एक प्रदर्शन में तब्दील हो गयी। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के दिल्ली सचिव धीरेन्द्र शर्मा ने बताया कि ‘पीने योग्य पानी’ पर हर शहरी का बुनियादी अधिकार है। 21वीं सदी चल रही है। दिल्ली देश की राजधानी है। ‘पानी’ के लिए यहां मां, बहनों व बच्चों को टैंकरों के पीछे दौड़ना पड़ता है। यह आधुनिक और सभ्य नागरिक समाज पर एक कलंक है। नागरिकों का अपमान है।

प्रदीप कुमार चैहान ने कहा कि बिजली की भांति, बिना किसी भेदभाव के दिजेबी घर-घर पीने का पानी उपलब्ध कराए। उचित शुल्क लें। ऐसा करने से, न सिर्फ वोट बैंक की गंदी राजनीति रूकेगी, बल्कि पानी की बर्बादी, टैंकर पर अनावश्यक खर्च, भूमिगत पानी की अबाध चोरी, रुकेगी और भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी। दिजेबी की आय बढ़ेगी। नए रोज़गार बढ़ेंगे। इस जायज़ मांग को लोक राज संगठन 2004 से उठाता आ रहा है।

लोक राज संगठन के दिल्ली सचिव बिरजू नायक ने बताया कि संजय कालोनी (ओखला) के निवासी 41 साल से पानी के टैंकर के पीछे भाग रहे हैं। गांव, झुग्गी-झोपड़ी, पुनर्वासित व कच्ची कालोनी में रहने वाले नागरिकों को ‘दोयम दर्जे’ का कहकर, इनके घरों के अंदर पीने का पानी उपलब्ध कराने से सरकार इनकार करती है। घर-घर बिजली कनेक्शन है, लेकिन सबसे ज़रूरी ‘पानी’ का कनेक्शन नहीं है!
संजय कालोनी (ओखला) के स्थानीय निवासी पिंटू भाई कहा कि दिजेबी कनेक्शन वाले घर में, 20 हजार लीटर तक पानी हर महीने फ्री में मिलता है। 14 लाख परिवारों के पास दिजेबी के कनेक्शन नहीं हैं! तो फ्री कैसा? 
स्थानीय निवासी लोकेश कुमार ने कहा कि, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस मांग पर हमसे मिलने से इनकार करते रहे हैं। अतः इसी मुद्दे को लेकर, 27 जुलाई, 2016 को संसद मार्ग पर धरना देना पड़ा। इसके ठीक एक महीने बाद, सरकार ने 30 अगस्त, 2016 झुग्गी बस्तियों, कच्ची और पुनर्वास कालोनियों में घर-घर पानी पहुंचाने के लिए ‘जल अधिकार कनेक्शन’ योजना की घोषणा की। आज घोषणा हुए ढाई साल होने को आ रहा है, लेकिन जमीन पर लागू नहीं है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि, दिल्ली सरकार ने घर-घर पीने का पानी नहीं पहुंचाया तो, हरेक कालोनी इस सरकार के खिलाफ़ प्रदर्शन करेगी।
प्रदर्शन को संबोधित करने वालों में थे - कम्युनिस्ट ग़दर पार्टी से संतोष कुमार, पुरोगामी महिला संगठन से पूनम, स्थानीय निवासियों - पूजा, रौनिक साग, ओम प्रकाश, हरिओम, विरेन्द्र कुमार, संदीप कुमार, अकबर खान, राजू आदि। 
इस प्रदर्शन के उपरांत, हुसैन और प्रदीप कुमार दो सदस्य प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को एक ज्ञापन सौंपा।

सोमवार, 19 नवंबर 2018

राजधानी दिल्ली में पीने के पानी के लिए नौजवानों का आंदोलन।


"पानी" जो हर इंसान की पहली जरूरत है। पानी जिसके बिना जीवन संभव नही। पानी जो हर सरकार की जिम्मेदारी है कि वो हर नागरिक को सम्मान के साथ मुहैया कराए।

देश की राजधानी दिल्ली, जहा एक तरफ जगमगाहट है, चकाचौंध है, संसद भवन, लाल किला, अक्षरधाम जैसे पर्यटक स्थल हैं। स्टैण्डर्ड ऑफ लिविंग बहोत हाई है। जिसे देखकर गर्व होता है की हम दिल्ली में रहते हैं।
लेकिन ये सिक्के का सिर्फ एक पहलू है। दिल्ली का एक रूप और भी है जिसे अगर प्रेजेंट किया जाए तो शायद आप भी शर्म महसूस करेंगे।
साथियों यहां बात हो रही है दिल्ली के ओखला इंडस्ट्रियल एरिया में बसे संजय कॉलोनी व आसपास की कॉलोनियों की। 40 साल पहले इन कॉलोनियों को ओखला इंडस्ट्रियल एरिया के बड़े इंडस्ट्रियल घरानों को फायदा देने व सस्ते लेबर मुहैया कराने के लिए बसाया गया था।


ये वो दिल्ली है जहां की औरतों को कई कई घंटे, आधे आधे दिन पानी के लिए, टैंकरों के इंतजार में सड़कों पर बिताना पड़ता है। पति के रोजगार और बच्चों के स्कूल ना छूटे इसके लिए इन्हें खुद बाल्टियों, टंकियों और साइकिलों से पानी भरने का बीड़ा उठाना पड़ता है। चाहे बीमार हों या प्रेगनेंसी हो अगर टैंकरों पर नहीं जाएं तो पीने तक का पानी नहीं मिल सकता।
यहां की बच्चियों को स्कूल बैग की जगह टंकी व बाल्टियों को लेकर जाना पड़ता है। स्कूल जाने में देर हो रही हो या स्कूल छूट ही क्यों न जाये पर टैंकर का इन्तेजार करना और हर हाल में पानी भरने इनकी मजबूरी है। अगर ये पानी छोड़ स्कूल जाएं तो खुद की पढ़ाई तो होगी पर पूरे परिवार को पीने का पानी नहीं मिलेगा।
यहां के बुज़ुर्गो को मजबूरन घुटने का दर्द लिए पानी के लिए दौड़ लगाना पड़ता है। मैन रोड से कंधे पर या साइकिलों से अपनी गली, अपने घर तक ढोकर लाना पड़ता है। 
यहां के मजदूर को पानी के लिए अपने दहाड़ी और नौकरिया की बार बार कुर्बानी देनी पड़ती है। टैंकर आने में देरी या पानी भरने में देरी हो जाये तो लेट होने की वजह से हाफ डे लग जाता है या कई बार वापिस आना पड़ जाता है।
यहां के लड़कों के लिए शादी के रिश्ते नही आते क्योकि देश की राजधानी दिल्ली में ऐसे जगह है जहा घूंघट में रहकर भी पानी भरना पड़ता है।
यहां के नेताओं ने पानी की समस्या को ज्यों का त्यों बना कर रखा है। इसकी पूर्ति के वादों व लालच देकर कॉलोनी के लोगों का वोट छला जाता है। और मजबूर किया जाता है की नौजवां उनके आगे पीछे घूमें।
40 वर्षों से लगातार अनेक पार्टियां आयीं पर किसी पार्टी ने पानी के घर घर कनेक्शन के लिए काम नहीं किया। इस समस्या के ज्यो का त्यों बनाकर वोट बटोरने का मुख्य हथियार के रूप में जीवंत रखा गया है।
देश के सबसे बड़े आंदोलन से आयी, दिल्ली की सबसे ज्यादा बहुमत प्राप्त पार्टी से लोगों को बहुत उम्मीदें थी की सालो  से सुखी कॉलोनोयों को ये पानी देगी और परमानेंट सोल्ल्युशन निकलेगी।
लेकिन पिछले 3 वर्षो मे इस पार्टी ने भी इसपर कोई काम नहीं किया और लोगों को धोखा दे रही है।

नौजवानों का आंदोलन

यहां के नौजवां जिनका बचपन यह बिता है और अब वो बच्चे वाले बनने लगे है। इन्होंने घर घर पानी के कनेक्शन की मांग के लिए एक आंदोलन चलाया हुआ है जिसमे वो घर घर जाकर लोगो को जागरूक कर रहे हैं।
गली गली नुक्कड़ सभाएं कर लोगों को एकजुट कर रहे है।
नाटकों, कविताओं और गीतों के द्वारा लोगों को संगठित कर रहे है।  और धीरे धोरे नौजवानों की एक फौज तैयार हो रही है जो इस मांग को घर, गली, कॉलोनियों के रास्ते पूरे क्षेत्र और पूरी दिल्ली में लेकर जा रहे है। 

ये आन्दोल एक व्यापक रूप लेता जा रहा है जिसमे लोग भीख की तरह, भेड़ बकरियों की तरह मिलने वाले पानी को अपने अधिकार बतौर देने की मांग कर रहे है। इंसान बतौर सम्मान के साथ देने की मांग कर रहे है। मांग कर रहे हैं की उनके घरों में जल बोर्ड का कनेक्शन लगाकर, मीटर लगाकर पानी दिया जाए।

गुरुवार, 22 मार्च 2018

बेटियां बहुत संभाली है अब बेटों की बारी है : प्रदीप चौहान

बेटियां बहुत संभाली है अब बेटों की बारी है




8 मार्च महिला दिवस, ऐसा दिन जो महिलाओं के लिए हर्ष और उल्लास का दिन होता है, महिलाएं अपनी खुशी का इजहार करती हैं, जगह जगह अलग अलग संस्था इस दिन को बहुत धूमधाम से मनाते है। महिलाओं को उनके हक के प्रति, उनके अधिकारों के प्रति, और समाज में हो रहे उत्पीड़न के प्रति उन को जागरुक करने के लिए अलग-अलग तरीकों से कार्य करते हैं और समाज में एक बेहतर स्थान पाने व दिलाने के लिए संघर्ष करते हैंI वह सभी संस्थान इस दिन को धूमधाम से मनाते हैं

देश के बेहतरीन स्वयं सेवी संस्थानों में से एक, दीपालया संस्था के द्वारका  शाखा में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला  जहां 8 मार्च को बड़ी धूमधाम से मनाया जा रहा था महिलाओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में बढ़.चढ़कर हिस्सा लिया और ग्रुप नृत्य के जरिए, बच्चियों ने नुक्कड़ नाटक के जरिए, कविताओं के जरिए अपनी खुशी का इजहार किया

कुछ महिलाओं ने अपने जीवन में होने वाले परिवर्तनों को सांझा किया। कुछ ने अपने जीवन में होने वाले उतार-चढ़ाव से ऊपर उठकर, नारी शक्ति को पहचानते हुए, उसकी रक्षा के लिए किए गए अपने संघर्षों को भी साझा किया कुछ माताओं ने यह भी शेयर किया कि उन्होंने अपने जीवन में अपनी बेटियों को सही मार्ग दिखाने,  उन्हें सिखाने व पढ़ाने में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया जिसकी बदौलत बेटियों ने परिवार व समाज में एक अच्छा मुकाम हासिल किया है  लेकिन दूसरी तरफ चिंता थी कि हम अपने बेटों को उनकी हद समझाने में असफल हो गए

बेटे आजकल समाज से कटते जा रहे हैं छोटी छोटी उम् में नशे का शिकार होते जा रहे शिक्षा को ठुकराकर गलत आदतों को अपना रहे हैं जिंदगी में मेहनत से दूर भागकर छोटा मार्ग अपनाना चाहते हैं। और इसलिए चोरी झपटमारी जैसे अपराधों में लिप्त होते जा रहे हैं

कुछ महिलाएं ने यह शेयर किया कि आज हम बेटियों को बाहर  भेजने से डरते हैं कि कहीं वह छेड़छाड़ और इस तरह के तमाम अपराधों शिकार ना हो जाए। महिलाओं ने यह भी शेयर किया की छेड़छाड़ की घटनाओं में लड़के, नौजवान लिप्त होते हैं वह किसी ना किसी के भाई और बेटे ही होते हैं इसलिए अपने बेटों को यह समझाना है कि तुम्हारी सीमा क्या है। किसी बेटी के साथ कुछ होता है तो यह नहीं भूलना चाहिए कि वह भी किसी की बहन है और किसी की मां है

सभा में मौजूद 150 से 200 महिलाओं ने लंबी चर्चा के बाद एक दूसरे को कुछ समाधान सुझाएं और मिलकर यह संकल्प लिया कि बेटों के कान पकड़कर उन्हें सही राह पर लाना होगा

इस सुनहरे मौके पर महिलाओं का लिया हुआ यह संकल्प समाज में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है आज हर परिवार में,  हर महिला,  हर मां को यही संकल्प लेना चाहिए की बेटों को सही राह पर रखा जाए सही राह पर लाया जाए और उन्हें उनकी हद, उनकी सीमा समझाई जाए


नशे की दलदल में डूबता बचपन : प्रदीप चौहान

दिल्ली की स्लम बस्तियों में दस-दस साल के बच्चे, छोटी उम्र में गांजा, शराब व अन्य बुरी आदतों के शिकार हो रहे हैं। जिस उम्र में ज्यादातर बच्चे...