क्या नोटबंदी से भ्रष्टाचार का अंत होगा?
8-9 नवम्बर की मध्यरात्रि के बाद से रिज़र्व बैंक द्वारा जारी सभी 500 और 1000 रुपये के नोटों को अवैध घोषित किया गया है।
8 नवम्बर को नोटबंदी का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों को आह्वान करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार काला धन जाली नोट और आतंकवाद के खिलाफ़ जंग में हम लोग थोड़ी सी परेशानियों वह भी कुछ दिनों के लिए तो झेल ही सकते हैं। मेरा पूरा विश्वास है कि देश का प्रत्येक नागरिक भ्रष्टाचार की सफाई के इस महायज्ञ में मिलकर खड़ा होगा”।
हमारे देश के करोड़ों लोगों ने वास्तव में परेशानियों को सहा है और सह रहे हैं। चाहे मूलभूत अधिकारों] रोजगार] शिक्षा, स्वास्थ्य, पानी, बिजली इत्यादि कि परेशानियां क्यों न हो। इन परेशानियों साथ-साथ प्रचलन की मुद्रा में से 86 प्रतिशत की नकदी को अचानक से हटाये जाने से मजदूरों किसानों रेहड़ी पटरी वालों दुकानदारों तथा अन्य बहुसंख्य लोगों पर कहर टूट पड़ा है।
अधिकतर कारखाने, वर्कशॉप, सब्जी मंडियां तथा ट्रक ऑपरेटरों के काम ठप्प हो गए हैं। लाखों मजदूरों को काम का भुगतान नहीं किया जा रहा है। किसान अपनी फसलों को बेचने और रबी की फसल की बुआई के लिए बीज और खाद खरीदने में असमर्थ हुए। लगभग 40 करोड़ लोग जो दैनिक नकद आय पर निर्भर हैं, वे सबसे बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं।
हमारे देश में केवल 30 प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिनका पैसा किसी बैंक खाते में है। बाकी लोग पुराने बेकार नोटों को बदलने के लिए बार-बार बैंक जाने के लिए विवश हुए। बैंक में काम करने वाले श्रमिकों पर असहनीय बोझ है। वे तनाव के महोल में काम करने को मजबूर हैं जहां लोगों का गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है। इसके साथ ही रिर्जव बैंक और केन्द्र सरकार की इन 48 दिनों में बार-बार दिशानिर्देश बदले जाने से लोगों की परेशानियों और बढ़ती गई है।
भ्रष्टाचार की जड़
प्रधानमंत्री दावा करते हैं कि भ्रष्टाचार की बीमारी को कुछ वर्ग विशेष के लोगों ने अपने स्वार्थ के कारण फैला रखा है”। किंतु यह भी सच है कि भ्रष्टाचार इस आर्थिक और राजनैतिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है, जिसमें सरकारी अधिकारी कुछ लोगों निहित स्वार्थ के हित में कार्य कर रहे हैं।
जैसे-जैसे पूंजी कुछ घरानों के लोगों के हाथों में इकट्ठा हो रहा है और राष्ट्र पर इजारेदारों का वर्चस्व बढ़ रहा है भ्रष्टाचार का पैमाना भी साथ-साथ बढ़ रहा है। केवल हिन्दोस्तान में ही नहीं बल्कि सभी देशों में यही स्थिति है।
हमारे देश में भ्रष्टाचार व्यापक पैमाने पर है। भ्रष्टाचार ने सभी सार्वजनिक सेवाओं को प्रभावित किया है। नौकरशाही, न्याय व्यवस्था, पुलिस और राज्य के अन्य तंत्र ऊपर से नीचे तक पूरी तरह से भ्रष्ट हैं। यह ब्रिटिश शासन काल से चलता आ रहा है। इन तंत्रों को आम लोगों को आखिरी सांस तक निचोड़ने और उनके आगे झुकने को मजबूर करने के लिए बनाया गया था।
हमारे समाज को सभी तरह के भ्रष्टाचार और शोषण से मुक्त करने के लिए क्रान्तिकारी बदलाव की ज़रूरत है। वर्तमान व्यवस्था जो शोषक वर्ग की सेवा करता है, उसके स्थान पर ऐसे व्यवस्था का निर्माण करना होगा जो सभी लोगों की सुरक्षा और खुशहाली सुनिश्चित करने के लिये वचनबद्ध होगा।
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